Entry: premikA AvashyakatA yA faishan Sunday, June 20, 2004



प्रेमिका:आवश्यता या फैशन

प्रेमिका हर युवक की एक जरूरत । पर क्यों? इसका जबाब लाख सोचने पर भी मिल न सका । जूतों के लिए मोजा,जेब के लिए बटुआ,और गर्दन के लिए टाई का औचित्य तो समझ में आता है, पर हर युवाओ के लिए एक प्रेमिका की जरूरत समझ मे नहीं आती है । वैसे कुछ रसिया किस्म के युवक ,जो शायद प्रोफेशनल होते हैं,एक समय मेंं तीन चार प्रेमिकायें रखते हैं और मौसम तथा जरूरत के हिसाब से उनका इस्तेमाल "हेंडल विथ केयर" करते हैं । इस किस्म के रसिया युवक के मित्र भी अच्छे खासे फायदे में रहते थे ।

एक घटना हाल की है,मेरा एक मित्र जो रसिक मिजाज था ,था इसलिए क्योंकि अब उस बोचारे कि हालत धोवी के गदहे जैसी है न घर का न घाट का ,वेचारा बीच का होकर रह गया है। एक लडकी जो उसकी पडोसन थी उसे पसंद आ गयी। पसंद क्यों आ गयी इसके भी कई कारण हैं ।

१. लडकी स्वजातीय थी ,ताकि भविष्य में विवाह इत्यादि में कोई वाधा ना आये और दहेज में मोटी रकम वसूली जा सके ।
२.पडोस में रहने के कारण मिलन-जुलने मे समय और धन की वचत होती है।
३.घर में आना जाना रहने के कारण प्रेमालाप के भी पर्याप्त अवसर मिलते हैं। मसलन घर के सभी सदस्य किसी विवाह आदि में सम्मिलित होने गये हो और आप बंद कमरे में प्रेमिका के साथ "ओले ओले या जवानी की अंगराई "आदि फिल्मों के दृश्यों का अभ्यास कर सकें ।

मेरे मित्र को भी अभ्यास के कई अवसर मिले ,और उसने भी मन लगाकर अभ्यास किया,परिणामस्वरुप वह एक व्यावसायिक प्रेमी बन सका । अब हम मुख्य कहानी पर आते हैं। गोपनीयता को बनाये रखने के लिए हम उसकी प्रेमिका का एक काल्पनिक नाम श्रीदेवी रख लेते हैं।

श्री देवी पर "आँख का अंधा नाम नयन सुख "लोकोक्ति सौ फीसदी सही बैठती थी। वह सौ मीटर की दूरी से शशिकला और नजदीक से ललिता पवार लगती थी । मेरा मित्र जो गणित के "हिट एण्ड ट्रायल मेथड " से काफी प्रभावित था, श्री देवी को ही ट्रायल के लिए चुन लिया । उसने चार पृष्ठीय प्रेम पत्र का मसौदा तैयार किया । लंगोटिया यार होने के नाते मुझे भी प्रेम पत्र पढने का मौका मिला। प्रेम पत्र पढकर मैं तो दंग रह गया । वह प्रेम पत्र कम उसका वायोडाटा अधिक था ।उसके कुछ महत्वपूर्ण अंश मैं नीचे पेश कर रहा हूँ ।


मेरी श्रीदेवी

तूझे प्यार ही प्यार ,

जब से तूम्हें देेखा है ,मेरा दिल वेचैन है । न तो मैं अपने कलर टीवी पर सिनेमा देख पाता हूँ और न ही सीडी प्लेयर पर केई अंग्रेजी मुवी ही देख पाता हूँ । इस गर्मी के मौसम में रेफिर्जरेटर का पानी भी अच्छा नहीं लगता हैं । एयरकंडीशन भी मेरे मन की बेचैनी दूर नही कर पाता हैं। मेरा चार कमरे का फ्लैट मुझे काटने दौड़ता है । जब भी मै अपने मर्सडीज में घूमने निकलता हूं तो बगल की सीट पर तुम बैठी नजर आती हो । पिछले सप्ताह मुझे अपने चार सौ एकड के फार्म हाउस पर जाने का मौका मिला , वहाँ भी ख्यालों मे सिर्फ तुम ही तुम थी । कभी तो दिल करता है कि मै हिन्दुस्तान छोड कर अपने भाईसाहब के पास अमेरिका चला जाऊ । तुमने अगर मेरा प्यार कवूल नहीं किया तो मैं फिनिट पीकर मर जाऊँगा

तुम्हारा सिर्फ तुम्हारा

कखग



पता नहीं लडकी उसके जान देने की धमकी से प्रभावित हुयी या उसके सुविधा संपन्न फ्लैट से या कार से ,मगर अगले ही दिन उसके प्रेम निवेदन को स्वीकार कर लिया गया । लडकी ने रात के दो बजे छत पर मिलने का वादा किया । नियत समय पर मिलाकात हुयी। चुंबन ,आलिंगन, स्पर्श आदि आवश्यक वस्तुओं का आदान प्रदान हुआ तथा भविष्य में और उदार नीति अपनाने का आश्वान देकर लड़के को विदा किया । पुन: अगले दिन दो बजकर तीस मिनट पर चाँदनी रात में छत पर मुलाकात हुयी । लड़की ने सचमुच ही उदार नीति अपनाई । पूजा भट्ट, ममता कुलकर्णी से शुरु उसने हालीवुड की मर्लिन मुनरो तक को पीछे छोड दिया । इस अप्रत्याशित घटना से लडका चौंक गया, उसे लगने लगा कि लडकी उसे डबल क्रास कर रही है।

छानवीन करने पर सच्चाई सामने आ गयी । मेरा मित्र उसका प्रेमी नं० -१० निकला । उसी दिन सेमेरे मित्र ने प्रेमिका नं०-२ की तलाश प्रारंभ कर दी । पर मैं श्री देवी का प्रेमी नं०-११ बनने के फिराक मेॆ रहने लगा। मौका भी जल्दी मिल गया । मैंने उसके भाई को ट्युशन पढा़ना प्रारंभ किया । एक दिन नियत समय पर उसके घर पहुँचा , संयोग से सभी लोग घर से बाहर गयेे हुये थे , सिर्फ श्री देवी घर मे थी । मैने पूछा -लगता है सभी लोग बाहर गये हैं , कल आऊंगा ।उसने मुझसे चाय पीकर जाने का निवेदन किया । मैने सहर्ष स्वीकार कर लिया । आज पहली बार उसके निजी कमरे मे जाने का मौका मिला था । उसका कमरा ,कमरा कम सिनेमा घर ज्यादा लग रहा था । दीवारो पर अभिनेताओं की मांसपेशियां दिखाती तस्वीरे लगी हुयी थी। कुछ अर्धनग्न अभिनेत्रियों की भी तस्वीरे थी । मुझे घबराहट होने लगी, तभी श्री देवी चाय लेकर आ गयी ।

मैं नजरे झुकाकर चाय पीने लगा क्योकि वह मुझे घूर-घूर देख रही थी,जैसे कोई पंछी जाल मे फंसने वाला हो । उसने चुप्पी तोडते हुये कहा -आप बहुत हैंडसम दिख रहे हैं । पहली बार किसी लडकी के मुँह से तारीफ वह भी झूठी ,मेरेे लिए अप्रत्याशित था क्योंकि मुझे किसी भी कोण से हैंडसम नहीं कहा जा सकता था । मुझे खतरे का अहसास हुआ , पर जब ओखली मे सिर डाल दिया तो मूसल से क्या डरना । मैनैं भी मोनालिसा मुस्कुराहट चेहरे पर लाते हुए कहा-आप भी तो ममता कुलकर्णी की तरह दिख रही हैं । इसका उस पर सकारात्मक प्रभाव पडा और मुस्कुराकर उसने मेरे हाथ से खाली कप प्लेट ले लिया । इस क्रम में उसने मेरा हाथ पकड लिया । मुझे बिजली के करंट सा झटका लगा और मैने खिसक लेने मे ही भलाई समझी । अच्छा मै चलता हूँ,कल इसी समय आउँगा । गुडू को घर पर ही रहने को कहिएगा -यह कहकर मैॆने इजाजत चाही । 'थोडी देर रुक जाइये न ,मैॆ पकौडे तल रही हूँ,खाकर जाइये-उसने आग्रह किया ।उसके आग्रह में मुझे कोई रहस्य छिपा नजर आया ,मैं उस रहस्य को हर कीमत पर जानना चाहता था । बिना जोखिम उठाये किसी लाभ की कामना नहीं की जा सकती है ।

पाँच मिनट बाद वह पकौडे लेकर आ गयी । मैं पकौडे खाने लगा । अचानक वह मेरे बगल मे आकर बैठ गयी । एक पकौडे मेरे हाथों से भी खाइये-उसने जिद किया । मैं भला इंकार कैसे करता ,इक्कीस साल के जीवन मे यह पहला मौका आया था । एक के बाद दूसरा , दूसरे के बाद तीसरा और इसी क्रम में वह मेरे नजदीक आती गयी और जब तक मैं आखरी पकौडा खाता ,कोई दूसरी चीज ही खाने के लिए प्रस्तुत कर दी गयी थी । न ही बह पकौडा था और न ही समोसा ,न ही सख्त और न ही अत्यधिक मुलायम । दीवार पर टंगी अर्धनग्न तस्वीर की सजीव प्रतिमूर्ति । आँखों में अजीब आकर्षण था ,बातचीत का दौर खत्म हो चुका था ,अब कुछ कर दिखाने का समय आ गया था । उसने मेरा हाथ पकड कर मेरा मार्ग दर्शन किया । पहले मैंने दुर्गम चढाइयों को पार किया और फिर अनंत गहराइयों मे खो गया । जब बाहर निकला तो बडा़ अच्छा फिल कर रहा था । जाते -जाते उसने वोनस के रुप मे एक विलायती चुंवन दिया ,जिसकी कडवाहट आज भी अनुभव करता हूँ ।

मरे मित्र ने जल्दी ही प्रेमिका नं०-२ खोज ली । प्रेम जात-पात, अमीर-गरीव और उम्र कुछ नहीं देखता इसका अनुसरण करते हुये उसने अपने सेे उम्र में बडी एक लडकी से प्रेम कर लिया । प्रतिदिन सजसंवर कर मेरे मित्र मिलने जाते ,दिनभर की खिदमत के बदले मेेेेें सिर्फ देशी चुंवन ही हासिल होता था । ये लडकी भी कुछ पेशेवर अंदाज की थी,'प्रेमी कम नौकर' के सिद्धांत का इस्तेमाल करती थी । बेचारा दिन भर स्टेपनी की तरह घूमता , फिर भी सिर्फ 'देशी' ही मिलता था। 'विलायती' हासिल करने में उसे तीन महीने लगे । इस दौरान तीन हजार रुपया भी खर्च हो गया । बेचारा टेस्ट मैच ही खेलता रह गया ,वन डे मैच खेलने का मौका ही नहीं मिला । खीझकर उसने प्रेमिका नं०-२ से सन्यास ले लिया ।

अपने मित्र के टेस्ट मैच के दौरान भी मुलाकात उसकी प्रेमिका नं०-२ से होती रहती थी । अपने स्टेपनी को पंचर होते देखकर उसने मुझे अपना स्टेपनी बनाना चाहा । मैंने भी एक शातिर खिलाडी की तरह एडवांस में ही एक विलायती की मांग कर दी,मुझे पेशगी मिल भी गयी । अगले ही दिन उसने मुझे एक सुनसान पार्क मेॆ बुलाया , जहां अकसर प्रेमी युगल अपने रोमांस को फाइनल टच देने के लिए जाते थे । नियत समय से कुछ पहले ही मैं वहां पहुंच गया । कुछ प्रेमी युगल झाडी की आड में प्रेम का व्यापार कर रहे थे । ऐसा प्रतीत हो रहा था , जैसे प्रेम का सेल लगा हो। पार्क के दूसरे छोर पर कुछ झाडियाँ और पेड था , समय व्यतीत करने के लिये मैं उस ओर बढ़ गया । झाडियो के पीछे से कुछ अजीवों-गरीव ध्वनियां आ रही थी ,जो कभी धीमी हो जाती थी और कभी तेज । मैंने एक खोजी निगाह झाडी के उपर डाला ,एक आकृति पेंडुलम की तरह उपर नीचे झुलती नजर आयी । इतने में मेरी प्रेमिका ने पीछे से मुझे आवाज लगायी । तुम यहाँ खडे हो, मैं तुम्हे पूरे पार्क मे खोज रही थी-उसने कहा । चलो मैं तुम्हारा परिचय अपनी एक सहेली से करवाती हूँ-उसने कहा ।

उसकी सहेली आकर्षक थी। मैंने खोजी निगाहों से उसका डायमेंशन माप लिया , जो स्टैण्डर्ड आकडों से विल्कुल मेल खाता था । उसने हैलो कहकर हाथ बढाया,मैने हाय कहकर उसका हाथ लपक लिया । काफी नर्म मुलायम त्वचा थी । हमलोग पार्क के बेंच जो झाडियों के करीव थी,बैठ गये । मैं दोनो के बीच मे बैठा था । इतने में एक युवक झाडियों से पतलून ठीक करता हुआ बाहर निकला । हमलोगों को देखते ही उसके चेहरे पर शरारती मुस्कान फैल गयी । क्या भाई साहब दोनो हाथ मेॆ लड्डू -यह जुमला फेंककर वह चला गया ।

हमलोगों ने बातचीत का क्रम प्रारंभ किया । पहले पढाई के संबंध मे,फिर राजनीति पर ,फिर सिनेमा ,समाज ,सह-शिक्षा से होते हुए विवाह पूर्व लैंगिक सवंधों पर बातचीत करने लगे । मैं विवाह पूर्व लैेगिक संवंधों के सख्त खिलाफ था जबकि लडकियां इसका पुरजोर समर्थन कर रही थी। उनका मानना था कि अगर पुरुषों के लिए ऐसे संवंध रखने पर उन्हें बुरे नजरों से नहीं देखा जाता है तो स्त्रियों को भी समानता का दर्जा मिलना चाहिए । ऐसा करने से स्त्रियों की दशा मेॆ सुधार होगा और देश तरक्की करेगा । अंधेरा होने लगा था, मैने वापस चलने का अनुरोध किया। अरे अभी को साढे छह ही बजे हैं,थोडी देर और बैठते हैं-प्रेमिका ने कहा । मैं बहुत डर रहा था ,क्योकि अभी-अभी उन्होने विवाह पूर्व संवंधो पर जमकर बहस की थी और अगर तत्काल उस पर अमल करना प्रारंभ कर देती तो मेरे लिए संकट की स्थिति पैदा हो जाती । सचमुच मेरे लिए एक साथ दो-दो लड्डू खाना मुश्किल हो जाता ।

मेरी प्रेमिका की सहेली कुछ खुलकर बातें करने लगी थी और बातचीत के दौरान ही दोनो सहेलियों ने दो फूल एक माली की तरह दोनो तरफ से मुझे जकड लिया। बन डे मैच के स्पष्ट आसार नजर आ रहे थे। पहले ही वाउंसर के रुप में एक साथ दो विलायती चुंवन मिला , फिर स्पिन और गुगली की जो झडी लगी तो मेरे लिए एक -एक रन जोडना मुश्किन हो रहा था । बडी मुश्किल से मैं क्रीज पर टिका रहा । पार्क में घिर आये अंधेरे ने हमारे मैच मे चार चाँद लगा दिया । पार्क में लगी छह फीट लंबी बेंच की सार्थकता अब समझ में आ रहा था । मैंने भी अपना धैर्य नहीं खोया और सेंचुरी बनाकर ही दम लिया । प्रेमिका की सहेली जो अति उतेजना में हिन्दी भूल गयी थी ,बोली-हाउ नाइस ,यू हैव गाट ए विग माउस । मै घवराहट में इसका मतलव नहीं समझ सका । अस्त-व्यस्त कपडो को ठीक कर पार्क से खिसक लेने में ही भलाई समझी । मैंने रास्ते में निर्णय लिया कि अब दुबारा अपनी प्रेमिका से नहीं मिलूंगा । शुक्र था की आज वह केवल दो थी , आधी दर्जन होती तो मेरा अंजाम क्या होता, इसकी कल्पना मात्र की जा सकती है ।

अपने रसिक मित्र के संगति से जो अनुभव मुझे मिला था ,वह मेरे लिए पर्याप्त था । अब मैं बैसे मित्रों और उनकी प्रेमिकाओ से दूर ही रहता हूँ । इसके बाद भी कई अॉफर आये लेकिन सभी को समय और धन की बर्बादी समझ कर, मैने ठुकरा दिया । मेरा रसिक मित्र आजकल महिला कॉलेज के आगे मूंगफली बेचता है। प्रेमिकाओ के चक्कर मे पडकर उसका जो यह हाल हुआ है ,वह निश्चय ही हम युबाओ के लिए एक सबक है । फैशन या मित्रो पर धाक जमाने के लिए प्रेमिका रखना निश्चित तौर पर भारी पर सकता है । अत:हे युवा जन आप मेरे अनुभवो से लाभ उठाये और छात्र जीवन मे अपने लिए निर्धारित एकमात्र कर्म पठन-पाठन पर अपना ध्यान केन्द्रित करें । इस मेहनत और सक्रियता की आयु में प्रेमिकाएं आपको वास्तविकता से दूर सपनो की दुनिया मे ले जाएगी ,जहॉ से बापस लौटने पर आप अपना सब कुछ खो चुके होंगे । निष्कर्ष रुप मे प्रेमिका फैशन की वस्तु है,और इससे बचना चाहिए ।

जनहित मे जारी

( युवा कल्याण मंत्रालय )

   3 comments

SHUAIB
February 4, 2006   12:13 AM PST
 
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July 18, 2004   10:31 AM PDT
 
आपका लेखन चमत्कारी है। इतना सहज प्रवाह युक्त और हास्य-रस से परिपूर्ण लेख पहले कभी नहीं पढा। अद्भुत।
आलोक कुमार
June 23, 2004   08:17 PM PDT
 
:)

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